'स्मृति' के बहाने विभाजन के दंश को स्थाई बनाने की जुगत!
मेरे पिछले आलेख 'विभाजन की विभीषिका को याद करने का मकसद क्या है?' (21 अगस्त) को लेकर जो प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं हैं, उनमें कुछ वाक़ई परेशान करने वाली हैं। इन प्रतिक्रियाओं में न सिर्फ़ अगस्त 1947 के विभाजन की विभीषिका का स्मरण करने कà¥...
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