Sharir Hi Brahmand: Destination Of Our Life - शरीर ही ब्रह्माण्ड: जीवन का यात्रा-मार्ग
Opinion News in Hindi: सर्वेन्द्रिय मन बाहरी जगत के सम्पर्क में रहता है, वही महन्मन भीतर का मन कहलाता है। मन सदा इच्छा के साथ पैदा होता है। हृदय में रहा करता है। कामना पूर्ति के साथ मन भी मर जाता है। हृदय चक्र स्थायी भाव है।
Source: patrika.com