'कृष्ण बलदेव वैद' का 'अविनाश' को कभी न लिखा गया एक 'ख़त'
, अवज्ञा और अवहेलना को अपनी ज़िंदगी का हासिल क़रार दिया है। यहाँ पेश है , इन पंक्तियों के लेखक को उनके मार्फ़त कभी न लिखा गया एक ख़त : --- , मैंने तुम्हें कभी कोई ख़त नहीं लिखा। दरअस्ल, तुम्हारी उम्र के नौजवानों से मेरा संवाद और संबंध बहुत मुà¤...
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