व्यक्तित्व को निष्प्रभावी बनाता है झूठ
दिनेश चमोला ‘शैलेश’ मनुष्य का लालन-पालन जिस परिवेश में सहज रूप में होता जाता है, उसी के अनुरूप उसके भावी जीवन की कर्म व आदर्श की निश्चित समय-सारणी भी आकार लेती चली जाती है। उसके बाल मष्तिष्क में सारहीन कूड़ा-कचरा अथवा अनमोल रहस्य-चि...